बगाल ब्यूरो 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस की खटास कांग्रेस के साथ बढ़ती जा रही है। पार्टी ने अब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के साथ कोई भी मंच साझा नहीं करने का मन बनाया है। संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में कांग्रेस के साथ कोई कक्षा समन्वय नहीं करने का फैसला किया गया है। कांग्रेस के किसी सांसद द्वारा बुलाई गई विपक्षी नेताओं की बैठक में तृणमूल कांग्रेस अपना प्रतिनिधि भी नहीं भेजेगी।
तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि आगामी संसदीय सत्र में कांग्रेस के साथ कोई तालमेल नहीं होगा। हम कांग्रेस के सदन में विपक्ष की कोई बैठक नहीं करेंगे। हालांकि पिछले सत्र में लोकसभा और राज्यसभा में पार्टी के नेता के नहीं जाने के बावजूद कांग्रेस के बुलावे पर तृणमूल कांग्रेस ने कई बार मुख्य सचेतक या नए सांसदों को भेजा था। इस बार ऐसा नहीं होगा। पार्टी संसदीय दल की अध्यक्ष ममता बनर्जी की अध्यक्षता में सोमवार को तृणमूल कार्यसमिति की बैठक होगी। लोकसभा नेता सुदीप बनर्जी, राज्यसभा नेता डेरेक ओ ब्रायन, पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी जैसे सांसद मौजूद रहेंगे। पता चला है कि कांग्रेस के साथ समन्वय नहीं करने के फैसले को अंतिम रूप दिया जाएगा।
डेरेक ने कहा कि यह हमें तय करना है कि हम संसद में क्या कहेंगे। तृणमूल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि, फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी, किसान आंदोलन में मारे गए किसानों को मुआवजा, लखीमपुर खीरी कांड में दोषियों को सजा जैसे मुद्दों पर हमेशा मुखर रही है। कई मामलों में मैंने विपक्ष में मोर्चा संभाला है। कांग्रेस के साथ समन्वय की कोई जरूरत नहीं है।
पार्टी सूत्रों ने बताया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में जब मुख्यमंत्री दिल्ली गई थीं तब कांग्रेस नेताओं के साथ उनकी बेहतर तालमेल नहीं हो पाई अथवा दूसरे शब्दों में कहा जाए तो कांग्रेस नेताओं ने उन्हें बहुत अधिक तरजीह नहीं दी। इसी वजह से तृणमूल ने यह निर्णय लिया है।

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