सांसद रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय मंत्री को लिखा पत्र

 

विजय शंकर

पटना । पटना साहिब सांसद एवम पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद ने केंद्रीय शिक्षा एवं कौशल विकास एवं उधमशीला मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखा पत्र। श्री प्रसाद ने पत्र में केंद्रीय मंत्री को अवगत कराते हुए लिखा की भारत के प्रथम राश्ट्रपति डॉ0 राजेन्द्र प्रसाद ने बिहार के छपरा जिले में एक साधारण परिवार में जन्म लेकर अपनी प्रखर प्रतिभा और संकल्प से देष के सर्वोच्च पद राश्ट्रपति के रूप में रहकर 12 वर्शों तक अद्वितीय नेतृत्व किया। उनकी सादगी, सरलता, सहजता, ईमानदारी और मर्यादायुक्त आचरण देषवासियों को सदैव प्रेरित करता है।
वे बहुत ही प्रतिभावान् छात्र थे और जिला स्कूल से उन्होंने तत्कालीन बंगाल बोर्ड द्वारा संचालित मैट्रिक की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। अगर आज के संर्दभ में समझे तो उन्होंने आज के बिहार, झारखण्ड, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेष और असम जैसे बडे़ भूभाग में होने वाली मैट्रिक की परीक्षा में शीर्ष स्थान अर्जित किया।
कलकता विश्वविद्यालय से स्नातक और कानून की पढ़ाई में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा की छाप छोड़ी और उच्च श्रेणी में उच्च स्थान प्राप्त किया। कलकत्ता उच्च न्यायलय में जल्दी ही सफल अधिवक्ता बने और बाद में पटना उच्च न्यायलय बनने के बाद यहाँ वकालत करते हुए ख्याति-प्राप्त अधिवक्ता बने। सन् 1920 में राश्ट्रपिता महात्मा गाँधी के आह्वान पर देष की आजादी के आंदोलन में कूद पड़े और वकालत को त्याग दिया। आजादी के आंदोलन के दौरान कई बार जेल गये। वे आजादी के आंदोलन में एक बडे़ नेता के रूप में उभरकर निकले। अपने योग्य नेतृत्व से कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बने। वे एकमात्र राष्ट्रपति बने जिन्होंने केन्द्रीय मंत्री, संविधान सभा के सभापति और 12 वर्षो तक देश के राश्ट्रपति के पद को सुशोभित किया। डॉ0 राजेन्द्र बाबू का पूरा जीवन का निष्कर्ष प्रतिभा और मेधा का है। उन्होंने अपने आचरण में सदैव गरिमामयी मर्यादा को महत्वपूर्ण स्थान दिया। वे अजातषत्रु थे।
श्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जो को पत्र के द्वारा बताया की ऐसे महान देशभक्त, विलक्षण प्रतिभा के धनी, महान नेता, भारत रत्न जिन्हें पूरा देश देशरत्न पुकारता है, देश के महापुरुषो में एक, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के जन्मदिवस 3 दिसम्बर को ‘राष्ट्रीय मेधा दिवस (National Merit Day) घोषित करना एक बडे़ सम्मान की बात होगी जो आने वाली पीढ़ी को सदैव प्रेरणा देगी।

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