स्थानीय शीला मैरेज हाल में राम कथा का तीसरा दिन

विजय शंकर
पटना । स्थानीय शीला मैरिज हॉल में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में राम कथा में अयोध्या से आए विश्व विख्यात मानस मर्मज्ञ संत शिरोमणि रामानंद दास जी महाराज ने तीसरे दिन भगवान राम और सीता के स्वंबर की चर्चा की । उन्होंने कहा कि भगवान शिव का और भगवान श्री राम का विवाह सफल हो सका मगर नारद मुनि और सुपनखा का विवाह सफल नहीं हो सका। राजा जनक ने अपनी बेटी माता सीता के विवाह के लिए पांच गुण वाले राजकुमार की शर्तें रखी थी और साथ ही धनुष तोड़ने जैसा कड़ा शर्त भी रखा था । शादी के लिए कई राजकुमार आए थे और भगवान राम भी लक्ष्मण संग अपने गुरु वशिष्ठ मुनि के साथ स्वम्बर में पधारे थे। सभी राजकुमारों के साथ कोई गुरु नहीं आए थे । मगर राम के साथ गुरु आए जिससे राजा जनक ने भगवान को पहचान लिया था।

संत शिरोमणि रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि जब धनुष तोड़ने की बात हुई तो सभी राजाओं को मौका दिया गया मगर सभी नाकाम हो गए। भगवान ने शिव धनुष को कुछ पल में ही तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि धनुष टूटने पर जब महर्षि परशुराम गुस्से में पहुंचे तो वह भी भगवान को पहचान नहीं पाए मगर भगवान राम के मीठे और विनम्र संवाद से उनका गुस्सा ठंडा हुआ और बाद में उन्होंने भी भगवान को पहचान लिया । महर्षि परशुराम को सभी राजाओं ने प्रणाम किया मगर राम सीता को छोड़कर उन्होंने किसी को आशीर्वाद नहीं दिया। बाद में राजा जनक ने वशिष्ठ मुनि को राम के चारों भाइयों की शादी अपनी चारो राजकुमारियों से कराने का प्रस्ताव दिया जिसके बाद राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न की शादी एक साथ एक ही मंडप में संपन्न करा दिए गए।

इससे पूर्व शीला मैरिज हॉल में हर वर्ष प्रवचन करने वाले आचार्य कुशेश्वर चौधरी ने कहा कि प्रवचन ही अब एकमात्र रास्ता बचा है जिससे इंसान भगवान तक पहुंच सकता है, उनको पा सकता है और भक्त बन सकता है। उन्होंने कथा सुनने वालों की कम संख्या देखकर चिंता जताई और लोगों से प्रवचन के लाभ बताकर नियमित प्रवचन सुनने का आग्रह किया ।

उल्लेखनीय है कि प्रतिदिन अपराह्न तीन बजे से पाठ, प्रवचन शुरू होता है और संत रामानंद दास जी महाराज का राम कथा वाचन सांय 5 बजे से होता है।
स्थानीय लोग भी प्रवचन का लाभ ले रहे हैं । 24 दिसंबर से 3 जनवरी 2024 तक कार्यक्रम में प्रतिदिन प्रवचन भजन का कार्यक्रम आयोजित है ।

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