vijay shankar

पटना :
तेजस्वी के बयान पर पलटवार करते हुए जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री राजीव रंजन ने आज कहा है कि इतने दिनों से झूठ की दुकान बने राजद के युवराज ने आखिरकार स्वीकार ही लिया कि राजद कार्यकर्ताओं की नहीं बल्कि उनके माई-बाप की पार्टी है और अब उनके नेतृत्व में यह भाई-बहन पार्टी बनने की राह पर बढ़ चली है.

उन्होंने कहा कि तेजस्वी के राजद को ‘ए टू जेड’ की पार्टी भी बताया है. इससे राजद कार्यकर्ताओं को अधिक खुश नहीं होना चाहिए. इसका मतलब साफ है कि भाई-बहन के बाद उनके परिवार के ‘ए टू जेड’ सदस्य यानी भाई-भतीजे समेत तमाम रिश्तेदार ही राजद के नेता माने जायेंगे. उनका तात्पर्य है कि बिहार का जो व्यक्ति उनके खानदान की पालकी ढ़ोने को तैयार है वही उनका कार्यकर्ता बने. अपना राजनीतिक भविष्य देखने वालों के लिए राजद में कोई जगह नहीं है.

जदयू प्रवक्ता ने कहा कि बिहार के लोग वैसे भी राजद की असलियत से परिचित हैं. तेजस्वी चाहे लाख खुद को बहुजन, आधी आबादी और अगड़े-पिछड़ों का समर्थक बताये लेकिन हकीकत में यह उनकी जनता को बरगला कर वोट बटोरने की चुनावी रणनीति भर है. टिकट या महत्वपूर्ण पद बांटते समय इन्हें सिर्फ परिवार याद आता है या जमीन देने वाले. आम बिहारीयों व अपने कार्यकर्ताओं का महत्व इनके निगाह में कौड़ी भर भी नहीं है.

सवाल पूछते हुए उन्होंने कहा कि राजद को यदि बहुजनों की इतनी ही चिंता है तो उन्हें बताना चाहिए कि सत्ता में रहते हुए उन्होंने समाज के किसी वर्ग को आरक्षण क्यों नहीं दिया? राजद नेता को बताना चाहिए कि गरीबों को नौकरी देते वक्त उन्होंने उनसे जमीनें क्यों लिखवाई? वह बताएं कि क्यों उनके काल में दलितों-पिछड़ों को खुलेआम भून दिया जाता था लेकिन दोषियों के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की जाती थी? आज भी राजद के सर्वोच्च पदों पर परिवार के अलावा किसी दलित-अतिपिछड़े को जगह क्यों नहीं दी जाती. राजा के बेटे को राजा बनाने की राजद की परिपाटी से बहुजनों को क्या लाभ मिल रहा है?

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