सुबोध,
किशनगंज । बिहार के सीमावर्ती जिला किशनगज के खंड टेढ़ागाछ क्षेत्र के ग्राम खुरखुरिया में माता शबरी धर्म रक्षा समिति में स्वामी श्री श्रद्धानंद जी का बलिदान दिवस मनायी गयी। जिसकी अध्यक्षता धर्म रक्षा समिति के संयोजक नंद मोहन‌ ने की।ऋषि देव परियोजना के सभी सदस्यों ने भावपूर्ण नमन एवं स्वामी जी का नाम का जयकारा लगाया ।वही स्वामी श्री श्रद्धानंद जी के प्रेरणादायी जीवन गाथा पर विस्तृत चर्चा की गयी।
उल्लेखनीय है कि स्वामी श्रद्धानन्द सरस्वती (मुंशीराम विज ; 22 फरवरी, 1856 – 23 दिसम्बर, 1926) भारत के शिक्षाविद, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा आर्यसमाज के संन्यासी थे जिन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती की शिक्षाओं का प्रसार किया। वे भारत के उन महान राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे, जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता, स्वराज्य, शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया था। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय आदि शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की और हिन्दू समाज व भारत को संगठित करने तथा 1920 के दशक में शुद्धि आन्दोलन चलाने में महती भूमिका अदा की। डॉ भीमराव आम्बेडकर ने सन १९२२ में कहा था कि श्रद्धानन्द अछूतों के “महानतम और सबसे सच्चे हितैषी” हैं।

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