डीएम द्वारा लोक शिकायत के 20 मामलों की सुनवाई की गयी

बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 का सफल क्रियान्वयन प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता; सभी पदाधिकारी इसके लिए सजग, संवेदनशील तथा सक्रिय रहेंः डीएम

नवराष्ट्र मीडिया ब्यूरो

पटना : जिलाधिकारी, पटना डॉ. चंद्रशेखर सिंह द्वारा शनिवार को अपने कार्यालय-कक्ष में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 के तहत द्वितीय अपील में शिकायतों की सुनवाई की गयी और उसका निवारण किया गया। लोक शिकायत निवारण में लापरवाही बरतने के आरोप में एक लोक प्राधिकार के विरूद्ध कारण-पृच्छा किया गया।

डीएम डॉ. सिंह द्वारा आज लोक शिकायत के कुल 20 मामलों की सुनवाई की गई। 12 मामलों का ऑन द स्पॉट निवारण किया गया तथा 08 मामलांे में अंतरिम आदेश पारित किया गया। दो मामले में लोक शिकायत निवारण में अरूचि एवं संवेदनहीनता के आरोप में दोषी अंचल अधिकारी, फुलवारीशरीफ के विरूद्ध कारण-पृच्छा किया गया।

दरअसल अपीलार्थी श्री जितेन्द्र कुमार, पता-न्यू जगनपुरा, अंचल फुलवारीशरीफ, अनुमण्डल-पटना सदर जिला-पटना द्वारा जिलाधिकारी के समक्ष लोक शिकायत निवारण हेतु द्वितीय अपील में वाद दायर किया गया था। अपीलार्थी की शिकायत दाखिल खारिज नहीं होने के संबंध में है। जिलाधिकारी ने समीक्षा में पाया कि लोक प्राधिकार द्वारा लोक शिकायत निवारण में शिथिलता बरती जा रही है। तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा लगभग एक साल से मामले को लंबित रखा गया था। परिवादी द्वारा अनुमंडल लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, पटना सदर के समक्ष दिनांक 12 अगस्त, 2023 को ही परिवाद दायर किया गया था। लगभग साढ़े चार महीना की अवधि में भी अंचल अधिकारी ने कोई सार्थक एवं ईमानदार प्रयास नहीं किया। उनका प्रतिवेदन भी असंतोषजनक तथा भ्रामक है। परिवादी को तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा बताया गया है कि भूलवश दाखिल खारिज वाद अस्वीकृत हो गया जिसके पश्चात उनके द्वारा suo moto अभिलेख वाद संधारित कर भूमि सुधार उप समाहर्ता को भेज दिया गया। अंचलाधिकारी के जबाव से भी परिवादी संतुष्ट नहीं हैं। परिवादी द्वारा बताया गया कि तत्कालीन अंचल अधिकारी ने जान-बूझकर उनके दाखिल खारिज वाद को अस्वीकृत किया है जबकि उनके द्वारा अंचल अधिकारी के समक्ष सभी तथ्यों को रखा गया था। जिलाधिकारी ने सुनवाई में पाया कि ऐसा ही मामला परिवादी श्रीमती गायत्री देवी द्वारा भी दर्ज किया गया है। तत्कालीन अंचल अधिकारी के विरूद्ध दो-दो मामलों में ऐसा आरोप आया है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि उनके द्वारा मामले के निष्पादन में इरादतन लापरवाही बरती गयी है। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी का यह व्यवहार लोक शिकायत निवारण की मूल भावना के प्रतिकूल है। लोक प्राधिकार के इस कार्यशैली से आवेदक की समस्या का इतने दिनों में भी समाधान नहीं हो सका है। डीएम ने कहा कि यह लोक प्राधिकार की स्वेच्छाचारिता, शिथिलता तथा संवेदनहीनता को प्रदर्शित करता है। जिलाधिकारी द्वारा इन आरोपों के कारण लोक प्राधिकार अंचल अधिकारी, फुलवारीशरीफ से स्पष्टीकरण किया गया। साथ ही भूमि सुधार उप समाहर्त्ता एवं अंचल अधिकारी को परिवादी के शिकायत का नियमानुसार निवारण करते हुए स्पष्ट प्रतिवेदन के साथ सुनवाई की अगली तिथि 20 जनवरी को उपस्थित रहने का निदेश दिया।

एक अन्य मामले में अपीलार्थी श्री प्रदीप कुमार पासवान, पता एकडंगा, प्रखंड बाढ़, अनुमण्डल बाढ़ द्वारा जिलाधिकारी के समक्ष लोक शिकायत निवारण हेतु द्वितीय अपील में वाद दायर किया गया था। अपीलार्थी की शिकायत नाली निर्माण की राशि की निकासी वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति द्वारा करने के बावजूद भी निर्माण कार्य नहीं किए जाने के संबंध में है। जिलाधिकारी द्वारा लोक प्राधिकार प्रखंड विकास पदाधिकारी बाढ़ को शेष कार्य को शीघ्र पूरा करने तथा दोषी व्यक्तियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने का निदेश दिया गया। साथ ही शिकायत का सम्यक निवारण करते हुए स्पष्ट प्रतिवेदन के साथ सुनवाई की अगली तिथि 2 फरवरी को उपस्थित रहने का निदेश दिया।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि लोक शिकायतों का ससमय तथा गुणवत्तापूर्ण निवारण अत्यावश्यक है। लोक प्राधिकारों को तत्परता प्रदर्शित करनी होगी।

डीएम डॉ. सिंह ने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम, 2015 का सफल क्रियान्वयन प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। सभी पदाधिकारी इसके लिए सजग, संवेदनशील तथा सक्रिय रहें।

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