नव राष्ट्र मीडिया
पटना।

अखिल भारतीय किसान सभा बिहार राज्य कमिटी की ओर से जमाल रोड पटना में स्वामी सहजानंद सरस्वती की 73वीं पुण्य तिथि के अवसर पर स्वामी सहजानंद सरस्वती का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता केडी यादव एवं संचालन विनोद कुमार ने किया।
संगोष्ठी का उद्घाटन अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बादल सरोज ने किया।
श्री सरोज ने बताया कि स्वामी जी का असाधारण व्यक्तित्व असाधारण क्षमता और असाधारण शिक्षा से भरे अनूठे व्यक्ति थे। उन्होंने बताया कि भारतीय किसान आंदोलन में उनका असाधारण योगदान था। वे बिहार एवं देश में बिखरे किसान आंदोलनों को एकजुट आंदोलन के निर्माता थे। स्वामीजी मैकिसम सेवा दल और उसके लिए कोष और वैचारिक रूप से विकसित करने पर विशेष महत्व दिया। आंदोलन एवं उससे प्राप्त अनुभव के आधार पर उन्होंने कहा कि जमींदारों से उनकी जमीन बिना किसी मुआवजे के छीन लेनी चाहिए। किसान आंदोलन की सफलता के लिए बंटवारे का कानून उत्तराधिकार के सवाल को स्पष्ट किया। उन्होंने दूरगामी विचार के अनुसार कहा कि आधे किसान को खेती छोड़कर दूसरे कामों में लग जाना चाहिए।
स्वामी जी ने भारतीय राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन करते हुए किसानों के सवाल पर अलग रुख अपनाया।
उनकी अंतरराष्ट्रीय समझ भी स्पष्ट थी। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीयवाद के बिना दुनिया के पैमाने पर समाधान संभव नहीं है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता एक सत्यता है।
उन्होंने यह भी कहा की हिंसा शोषकों का हथियार है और उसके खिलाफ होने वाली हिंसा नहीं है।
स्वामीजी ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण पंथ को धकेलने के लिए वामपंथियों के बीच सहयोग होना चाहिए। बिहार में बिना किसी हमदर्द की सरकार के शहादत के कारण कुरुक्षेत्र बना है।
कॉरपोरेट और साम्प्रदायिकता गठजोड़ को हटाओ देश बचाओ का नारा आज किसानों का नारा बन चुका है।
संगोष्ठी को विजय कुमार चौधरी, उमेश सिंह, नंद किशोर सिंह, ललन चौधरी, ऋषि आनंद, बिंदेश्वरी सिंह, नीलम देवी, अरुण कुमार मिश्रा, विश्वनाथ सिंह, अरुण कुमार सिंह, उदयन राय, और मणिकांत पाठक ने संबोधित किया। संगोष्ठी का समापन कॉ केडी यादव के अध्यक्षीय भाषण से हुआ।

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